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खेत से लाइव हुए ओपी चौधरी, केले के बाद लीची-नारियल-कटहल की खेती का साझा किया मॉडल

रायगढ़। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने अपने खेत से फेसबुक लाइव के जरिए आधुनिक खेती के अपने प्रयोगों की जानकारी साझा की। ‘मोर खेती’ के तहत उन्होंने पिछले करीब पांच वर्षों में किए गए खेती के प्रयोगों और टिश्यू कल्चर केले की खेती से अब स्थायी फलदार पौधों की खेती की ओर बढ़ने की जानकारी दी। इससे पहले भी चौधरी अपने खेत से खेती से जुड़े प्रयोगों और फसल प्रबंधन की जानकारी साझा करते रहे हैं।
चौधरी ने बताया कि उन्होंने शुरुआत टिश्यू कल्चर केले की खेती से की थी और तीन फसलें लेने के बाद धीरे-धीरे केले को हटाकर लीची, नारियल और कटहल जैसे स्थायी फलदार पेड़ों की ओर बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार, स्थायी फलदार पौधों में शुरुआती 4-5 वर्षों में देखभाल की जरूरत होती है, जबकि पेड़ तैयार होने के बाद लंबे समय तक उत्पादन लिया जा सकता है।
उन्होंने खेत में लीची और नारियल की इंटरक्रॉपिंग का पैटर्न भी बताया। एक लाइन में लीची और उसके बीच दूसरी लाइन में नारियल लगाया गया है। उनके अनुसार, कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर यह प्रयोग किया गया है, जिससे नारियल की छाया से सेमी-शेड का वातावरण तैयार हो और लीची पर गर्मी का असर कम किया जा सके।
एक अन्य हिस्से में नारियल के साथ कटहल लगाया गया है। चौधरी के मुताबिक, अर्ली वैरायटी के कटहल में दो वर्ष पूरे होने से पहले ही फल आना शुरू हो गया है। उन्होंने छोटे आकार के कटहल की वैरायटी के बारे में बताया, जिसका फल करीब 1 से 2 किलो तक रहता है और सब्जी के लिए बाजार में उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश से लाई गई बारहमासी कटहल की वैरायटी भी खेत में लगाई गई है।
नारियल में उन्होंने अलग-अलग वैरायटी का मिश्रण लगाने की जानकारी दी। खेत की बाहरी सीमा पर बांस लगाए गए हैं। उनके अनुसार, इससे तेज हवा और गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है और बांस से अतिरिक्त व्यावसायिक उपयोग भी संभव है।
पेड़ों के बीच खाली जगह में हल्दी की इंटरक्रॉपिंग की जा रही है। चौधरी ने बताया कि यह हल्दी की तीसरी फसल है और इससे पहले भी उन्हें अच्छे परिणाम मिले हैं। पेड़ों के बड़े होने के बाद सेमी-शेड में हल्दी और अदरक जैसी फसलों की इंटरक्रॉपिंग जारी रखने की योजना है।
उन्होंने कहा कि केले के बाद लीची, नारियल और कटहल के साथ किए जा रहे प्रयोगों से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। उनके अनुसार, इन प्रयोगों से छत्तीसगढ़ की परिस्थितियों में विविधीकृत और दीर्घकालिक खेती के मॉडल को लेकर किसानों को जानकारी मिल सकती है।
नोट: आपके दिए गए मूल कंटेंट में ओपी चौधरी के राजनीतिक व्यक्तित्व को “मील का पत्थर” और “विरला किरदार” बताने वाला मूल्यांकनात्मक बॉक्स भी है। उसे समाचार रिपोर्ट के मुख्य तथ्यात्मक हिस्से में शामिल नहीं किया है; वह राजनीतिक प्रशंसा/राय है, जबकि ऊपर की कॉपी खेती संबंधी उनके बताए प्रयोगों पर केंद्रित है।

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