रायगढ़ जिले के पुसौर में ‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत शुक्रवार को विशाल नि:शुल्क नेत्र जांच शिविर आयोजित किया गया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित शिविर में जिले के अलग-अलग गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। शिविर में कुल 3493 लोगों की आंखों की जांच की गई। जांच के बाद 3165 जरूरतमंदों को नि:शुल्क चश्मे वितरित किए गए, जबकि करीब 800 लोगों को दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
शिविर में लोगों की सुविधा के लिए 14 पंजीयन काउंटर बनाए गए थे। पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग पंजीयन व्यवस्था की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम सुबह 9 बजे से लगातार सेवाओं में जुटी रही। जांच और उपचार के लिए 10 से अधिक नेत्र विशेषज्ञों के साथ 38 नेत्र सहायकों ने सेवाएं दीं।
शिविर में आने वाले लोगों को पंजीयन से लेकर नेत्र जांच और चश्मा वितरण तक पहुंचाने में एनएसएस तथा स्काउट-गाइड के विद्यार्थियों ने वालंटियर के रूप में सहयोग किया। ग्रामीणों के लिए शिविर स्थल पर छाया, पेयजल, भोजन और स्वल्पाहार की व्यवस्था भी की गई थी।
वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने शिविर का अवलोकन किया। उन्होंने नेत्र जांच, चश्मा वितरण और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और मां सरस्वती के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर की। इस दौरान उन्होंने जरूरतमंद हितग्राहियों को अपने हाथों से चश्मे पहनाए और पांच हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड भी वितरित किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओपी चौधरी ने कहा कि आंखों की समय पर जांच जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों की दृष्टि जांच पर जोर दिया और कहा कि कई बार बच्चों को खुद अपनी आंखों की कमजोरी का पता नहीं चलता, जिसका असर उनकी पढ़ाई पर पड़ सकता है। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें भी 12वीं कक्षा तक आंखों की कमजोरी का पता नहीं चला था और बाद में जांच कराने पर चश्मे की आवश्यकता सामने आई।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लक्षण सामने आने का इंतजार करने के बजाय समय-समय पर जांच कराने की आदत विकसित की जानी चाहिए। आंखों और दांतों की जांच के साथ शरीर के अन्य स्वास्थ्य परीक्षणों के प्रति भी जागरूकता जरूरी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे शिविरों की जरूरत है, जहां लोगों को एक ही स्थान पर जांच, चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने ‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत आयोजित कार्यक्रम को जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का माध्यम बताया। उन्होंने शिविर के आयोजन में सहयोग करने वाले चिकित्सकों, नेत्र सहायकों, स्वास्थ्य विभाग, एनएसएस, स्काउट-गाइड के विद्यार्थियों और प्रशासनिक अमले के योगदान का उल्लेख किया।
शिविर में सुबह से सेवाएं दे रहे चिकित्सकों को प्रशस्ति पत्र और शाल भेंटकर सम्मानित भी किया गया। वन विभाग की ओर से लोगों को पीपल के पौधे वितरित किए गए।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि शिविर के लिए पिछले सात दिनों से ग्राम पंचायतों में प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। जिले की ग्राम पंचायतों से लोगों को शिविर तक लाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की गई थी। निजी चिकित्सकों को भी शिविर से जोड़ा गया था, जिन्होंने सुबह से लगातार अपनी सेवाएं दीं।
कलेक्टर ने बताया कि जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 45 हजार बच्चों की नेत्र जांच का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या की समय पर पहचान जरूरी है। उन्होंने पालकों से बच्चों से नियमित रूप से पढ़ाई और स्कूल में आने वाली परेशानियों के बारे में बातचीत करने की अपील की।
शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने नि:शुल्क जांच और चश्मे की सुविधा मिलने पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी। झारमुड़ा की सतरूपा पटेल ने बताया कि उन्हें दूर की चीजें देखने में परेशानी होती थी, लेकिन जांच कराने का अवसर नहीं मिल पा रहा था। शिविर में जांच के बाद चश्मा मिलने से उन्हें पढ़ने-लिखने और दैनिक कार्यों में सुविधा होने की उम्मीद है।
बायंग की योगिता महंत ने बताया कि कंप्यूटर चलाने के दौरान उन्हें सिरदर्द की परेशानी होती थी। जांच के बाद उन्हें चश्मा मिला। ग्राम बुनगा की पार्वती मैत्री ने भी आंखों से जुड़ी परेशानी के लिए शिविर में जांच कराई और सुविधा मिलने की बात कही।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक विजय अग्रवाल, नगर पंचायत अध्यक्ष मानी मोहित सतपथी, जनपद पंचायत अध्यक्ष हेमलता चौहान, जिला पंचायत सदस्य बृजेश गुप्ता, लक्ष्मी जीवन पटेल, भाग्यवती डोलनारायण, जैमिनी गुप्ता, नगर पंचायत उपाध्यक्ष उमेश साव सहित पार्षदगण मौजूद रहे। जिला पंचायत सीईओ अभिजीत बबन पठारे, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, चिकित्सक, एनएसएस एवं स्काउट-गाइड के विद्यार्थी और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी शिविर में शामिल हुए।

