रायगढ़ में औद्योगिक प्रदूषण और प्रस्तावित नई औद्योगिक परियोजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता और एल्डरमैन मनोज शर्मा ने जिले में बढ़ते वायु और जल प्रदूषण को लेकर चिंता जताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और घरघोड़ा क्षेत्र के नवापारा में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना की जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग की है।
मनोज शर्मा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में रायगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं, राखड़ और धूल के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का असर हरित क्षेत्र, खेती और आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है।
हालांकि, मनोज शर्मा की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए प्रदूषण, बीमारियों और प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है। उनके पोस्ट में लगाए गए आरोपों को उनके दावे के रूप में ही देखा जा रहा है। प्रदूषण के वास्तविक स्तर और उसके स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित विभागों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
मनोज शर्मा ने अपने पोस्ट में लिखा कि रायगढ़ में औद्योगिक इकाइयों की संख्या बढ़ती जा रही है और जिले की पर्यावरणीय स्थिति पर इसका असर पड़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारी स्थानांतरण के बाद दूसरे स्थानों पर चले जाते हैं, जबकि स्थानीय लोगों को लंबे समय तक औद्योगिक प्रदूषण का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने घरघोड़ा क्षेत्र के नवापारा में प्रस्तावित परियोजना की जनसुनवाई का जिक्र करते हुए इसका विरोध किया है। शर्मा ने सवाल उठाया कि पहले से औद्योगिक गतिविधियों और प्रदूषण का सामना कर रहे क्षेत्र में एक और औद्योगिक परियोजना स्थापित किए जाने से पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा, इसकी क्या गारंटी है।
हाल में नवापारा (टेंडा)-चारमार क्षेत्र में बीएस स्पंज प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित स्टील एवं पावर परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई को लेकर भी विरोध सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना की जनसुनवाई 28 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है। परियोजना से जुड़े दस्तावेजों में करीब 35.37 हेक्टेयर भूमि और लगभग 1,755 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत का उल्लेख किया गया है।
इस परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों की ओर से भी पर्यावरण, जल, वायु प्रदूषण, राख प्रबंधन, भारी वाहनों की आवाजाही और कृषि पर संभावित प्रभाव से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में परियोजना क्षेत्र के आसपास वन क्षेत्र और जलस्रोतों की स्थिति को लेकर भी सवाल सामने आए हैं।
मनोज शर्मा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि रायगढ़ में प्रदूषण के कारण कैंसर, किडनी और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं। हालांकि, इन स्वास्थ्य संबंधी दावों के समर्थन में उनके पोस्ट में कोई चिकित्सकीय अध्ययन, सरकारी स्वास्थ्य आंकड़ा या आधिकारिक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इन्हें तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नई औद्योगिक परियोजनाओं की जनसुनवाई महज औपचारिकता बनकर रह जाती है। पोस्ट में उन्होंने भ्रष्टाचार और बिचौलियों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के संबंध में भी कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। संबंधित अधिकारियों या परियोजना प्रबंधन की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया का उल्लेख उपलब्ध सामग्री में नहीं है।
मनोज शर्मा ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और रायगढ़ विधायक एवं मंत्री ओपी चौधरी से नवापारा में प्रस्तावित जनसुनवाई को निरस्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरणीय प्रभावों को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने स्थानीय लोगों से भी प्रस्तावित परियोजना का विरोध करने की अपील की है। पोस्ट में उन्होंने कहा कि आम लोगों को बड़ी संख्या में एकजुट होकर परियोजना के खिलाफ अपनी आवाज उठानी चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने प्रदूषण के मुद्दे पर आंदोलन और अनशन की बात कही है। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में अनशन की तारीख, स्थान और अवधि का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

