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नवापारा में मुक्तिधाम की जमीन पर कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की शिकायत

रायगढ़ जिले के छाल तहसील क्षेत्र अंतर्गत नवापारा पंचायत में मुक्तिधाम के लिए आरक्षित शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। सोमवार को नवापारा के दर्जनों ग्रामीण जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुक्तिधाम की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग को लेकर कलेक्टर के नाम शिकायत आवेदन सौंपा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अंतिम संस्कार के लिए वर्षों से सुरक्षित शासकीय भूमि के कुछ हिस्सों पर पक्का और कच्चा निर्माण कर कब्जा किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि मुक्तिधाम के लिए उपयोग की जाने वाली भूमि शासकीय मद में दर्ज है और इसका उपयोग सार्वजनिक जरूरत के लिए किया जाता है। शिकायत के अनुसार, इसी भूमि के कुछ हिस्से में धीरे-धीरे निर्माण कर अतिक्रमण किए जाने का आरोप है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच कर जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।

ग्रामीणों के मुताबिक मुक्तिधाम गांव की महत्वपूर्ण सार्वजनिक भूमि है, जहां ग्रामीणों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था होती है। उनका कहना है कि यदि इस जमीन पर अतिक्रमण बढ़ता रहा तो आने वाले समय में अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त जगह की समस्या पैदा हो सकती है। इसी आशंका को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से समय रहते कार्रवाई करने की मांग की है।

हालांकि, शिकायत में लगाए गए अतिक्रमण के आरोपों की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और राजस्व सीमांकन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मौके पर सीमांकन कराकर यह निर्धारित करने की मांग की है कि शासकीय भूमि का वास्तविक क्षेत्रफल कितना है और संबंधित भूमि पर किसी प्रकार का अनधिकृत कब्जा या निर्माण हुआ है या नहीं।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस मामले को स्थानीय स्तर पर भी उठाया था और अतिक्रमण रोकने तथा समस्या के समाधान की मांग की थी। अपेक्षित समाधान नहीं होने के बाद ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर के नाम शिकायत सौंपी। कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कराने और शासकीय भूमि को सुरक्षित रखने की मांग की।

शिकायत में ग्रामीणों ने मुक्तिधाम के लिए दर्ज शासकीय भूमि का मौके पर सीमांकन कराने की मांग रखी है। उनका कहना है कि सीमांकन होने से भूमि की स्पष्ट पहचान हो सकेगी और यह भी पता चलेगा कि संबंधित भूमि के किसी हिस्से पर अतिक्रमण किया गया है या नहीं। यदि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग की गई है।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि मुक्तिधाम की भूमि को भविष्य में सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाए। शासकीय भूमि पर अनधिकृत निर्माण या कब्जा पाए जाने की स्थिति में संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही ग्रामीणों ने भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए भूमि की स्पष्ट पहचान और संरक्षण की व्यवस्था करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

ग्रामीणों का कहना है कि मुक्तिधाम केवल एक भूमि का टुकड़ा नहीं बल्कि पूरे गांव की सामुदायिक जरूरत से जुड़ा सार्वजनिक स्थल है। यहां अंतिम संस्कार की व्यवस्था होने के कारण इसकी भूमि को सुरक्षित रखना आवश्यक है। ग्रामीणों के अनुसार यदि वर्तमान में कथित अतिक्रमण को नहीं रोका गया तो भविष्य में उपलब्ध जगह लगातार कम हो सकती है और इसका सीधा असर गांव के परिवारों पर पड़ेगा।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले में राजस्व रिकॉर्ड की जांच के साथ मौके का निरीक्षण कराया जाए। इसके बाद सीमांकन के आधार पर भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए मुक्तिधाम की जमीन को सुरक्षित किया जाए।

अब इस मामले में प्रशासनिक जांच और राजस्व सीमांकन महत्वपूर्ण होगा। इन्हीं के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित भूमि पर कितना अतिक्रमण हुआ है और भूमि की वर्तमान स्थिति क्या है। फिलहाल ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम शिकायत सौंपकर मुक्तिधाम की शासकीय भूमि को सुरक्षित रखने और कथित अतिक्रमण पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

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