रायगढ़। जिले में हाथियों और ग्रामीणों के बीच जुड़ाव की तस्वीर सामने आई है। बाकारूमा रेंज के ससकोबा में गणेश चतुर्थी के दिन जन्मे हाथी शावक की मंगलवार को ग्रामीणों ने जंगल में छठ्ठी मनाई। वहीं, तमनार क्षेत्र में बुधवार सुबह एक अन्य हाथी शावक का शव तालाब में मिला। वन विभाग ने शव का पोस्टमॉर्टम कराया है।
वन परिक्षेत्र बाकारूमा के ससकोबा क्षेत्र में 8 सितंबर को पत्थलगांव की ओर से 11 हाथियों का दल पहुंचा था। इसी दौरान दल की एक मादा हाथी ने गणेश चतुर्थी के दिन शावक को जन्म दिया। इसके बाद दल में हाथियों की संख्या बढ़कर 12 हो गई। दल में 3 नर, 5 मादा और 4 शावक शामिल हैं।
शावक के जन्म की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल था। मंगलवार को जन्म के करीब 15 दिन बाद गनपतपुर और ससकोबा के बीच पुल के पास पहाड़ी जंगल की सीमा पर ग्रामीणों ने छठ्ठी कार्यक्रम आयोजित किया। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद ग्रहण किया गया। कार्यक्रम में गनपतपुर सरपंच हरिओमशंकर राठिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और बच्चे शामिल हुए।
वन विभाग कर रहा हाथियों की निगरानी
हाथियों के दल में शावक होने के कारण वन अमला लगातार निगरानी कर रहा है। ग्रामीणों को प्रभावित जंगल क्षेत्र में अकेले नहीं जाने और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की समझाइश दी जा रही है।
तालाब में मिला दूसरे शावक का शव
इधर, तमनार थाना क्षेत्र के छैडोरिया गांव के पास बुधवार सुबह तालाब में एक हाथी शावक का शव मिला। वन विभाग के अनुसार उसकी उम्र करीब 3-4 दिन बताई जा रही है। तमनार रेंज के सामारूमा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से करीब 50 हाथियों का दल विचरण कर रहा था। मंगलवार देर रात झुंड के तालाब में उतरने के दौरान शावक पानी में डूब गया।
सूचना मिलने पर एसडीओ, रेंजर समेत वनकर्मी मौके पर पहुंचे और शव को तालाब से बाहर निकलवाया। घरघोड़ा सब डिवीजन के SDO आशुतोष मंडावा ने बताया कि शावक की मौत तालाब में डूबने से हुई है। हालांकि, मौत की विस्तृत वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी।

