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शासकीय संगीत महाविद्यालय की स्थापना पर लक्ष्मी प्रसाद बघेल ने जताया आभार

रायगढ़ में नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय की स्थापना और शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने पर शास्त्रीय गायन प्रवीण एवं इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के स्नातकोत्तर लक्ष्मी प्रसाद बघेल ने इसे जिले के कला और संगीत प्रेमी विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया है। उन्होंने महाविद्यालय की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, राज्यसभा सांसद और कलेक्टर के प्रति आभार व्यक्त किया है।

लक्ष्मी प्रसाद बघेल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि रायगढ़ में शासकीय संगीत महाविद्यालय की स्थापना की मांग लंबे समय से की जा रही थी। उनके अनुसार करीब 19 वर्ष पहले चक्रधर समारोह के मंच पर तत्कालीन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के.एम. सेठ को रायगढ़ में शासकीय संगीत महाविद्यालय की स्थापना की मांग को लेकर पहली बार ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, कलेक्टर और राजपरिवार के सदस्यों को भी इस संबंध में ज्ञापन दिए जाने का उल्लेख किया गया है।

विज्ञप्ति के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से पूर्व में भी इस संबंध में कार्रवाई शुरू की गई थी। इस प्रक्रिया से संबंधित पत्र कलेक्टर और डिग्री कॉलेज के प्राचार्य को भेजे जाने के साथ इसकी प्रतिलिपि लक्ष्मी प्रसाद बघेल को भी दिए जाने की बात कही गई है।

बघेल ने इससे पहले छत्तीसगढ़ के महाविद्यालयों और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में संगीत के प्राध्यापकों और शिक्षकों के पद स्वीकृत कर भर्ती करने की मांग भी उठाई थी। उनका कहना है कि इससे संगीत की उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों और कलाकारों के लिए रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं।

रायगढ़ में नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया सितंबर 2026 में शुरू की गई थी। जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचना के अनुसार महाविद्यालय में शास्त्रीय गायन (हिन्दुस्तानी), कथक नृत्य, लोक संगीत, हिंदी और अंग्रेजी विषयों में अध्ययन के लिए प्रवेश शुरू किया गया था। प्रारंभिक प्रवेश की अंतिम तिथि 28 सितंबर निर्धारित की गई थी।

बाद में बीपीए यानी बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स पाठ्यक्रम के लिए 40 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी सामने आई और आवेदन की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाए जाने की सूचना दी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बीपीए में शास्त्रीय गायन (हिन्दुस्तानी), कथक नृत्य और लोक संगीत जैसे विषयों में अध्ययन का अवसर दिया जा रहा है। महाविद्यालय का अस्थायी संचालन क्षेत्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान भवन, छोटे अतरमुड़ा, रायगढ़ से किया जाना है।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि रायगढ़ में पिछले कई दशकों से चक्रधर समारोह के आयोजन के कारण संगीत और कला का माहौल बना है। लक्ष्मी प्रसाद बघेल ने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह के सांगीतिक योगदान के कारण रायगढ़ की पहचान देश के साथ विदेशों में भी बनी है। ऐसे में जिले में शासकीय संगीत महाविद्यालय की स्थापना को उन्होंने स्थानीय युवाओं, नवशिक्षार्थियों और आने वाली पीढ़ी के लिए उपयोगी बताया।

उन्होंने कहा कि महाविद्यालय से संगीत और कला की शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी आगे रोजगार के अवसर तलाश सकते हैं और कला के क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकते हैं। उन्होंने संगीत में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों से प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने का आह्वान भी किया।

विज्ञप्ति में महाविद्यालय का नाम महाराजा चक्रधर सिंह के नाम पर रखने की मांग भी की गई है। बघेल का कहना है कि रायगढ़ की संगीत परंपरा और महाराजा चक्रधर सिंह के योगदान को देखते हुए महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया जाना उपयुक्त होगा।

महाविद्यालय की स्थापना को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, राज्यसभा सांसद और रायगढ़ कलेक्टर के प्रति रायगढ़ की कला प्रेमी जनता की ओर से आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि महाविद्यालय के माध्यम से रायगढ़ और आसपास के विद्यार्थियों को संगीत एवं कला शिक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर अवसर मिलेंगे।

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