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कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर शुरू, छत्तीसगढ़ की कोसा बुनाई विरासत को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की आजीविका एवं सामाजिक विकास पहल कोसाला ने 27 अक्टूबर को ताना-बाना समारोह का आयोजन किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कोसा बुनाई विरासत का उत्सव मनाने के साथ कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर का शुभारंभ किया गया। इस आयोजन में हिंडाल्को के वरिष्ठ अधिकारियों, कारीगर समुदायों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। नए केंद्र के माध्यम से कोसाला की गतिविधियों, कारीगरों के साथ उसके कार्य और आजीविका सृजन के प्रयासों को प्रदर्शित किया जाएगा।

कार्यक्रम में कोसाला के निदेशक और स्पेशियलिटी एल्युमिना बिजनेस के सीईओ सौरभ खेडेकर, केमिकल्स बिजनेस फाइनेंस के प्रमुख उन्नीकृष्णन प्रभाकरन, मुरी के बिजनेस हेड संदीप पाटिल और सीएचआर स्किल डेवलपमेंट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुखेंदु घोष उपस्थित रहे। राज्य रेशम विभाग, वीवर्स सर्विस सेंटर और नेशनल हैंडलूम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था।

परंपरागत रूप से दिवाली से पहले चांपा में आयोजित होने वाला ताना-बाना समारोह बुनकरों और कारीगर समुदायों के योगदान को सम्मानित करने के लिए जाना जाता है। इस वर्ष रायपुर में हुए आयोजन में पारंपरिक शिल्प के साथ उससे जुड़े लोगों के कौशल और आजीविका पर जोर दिया गया। कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि कौशल विकास, मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और बाजार तक पहुंच बनाने से पारंपरिक ज्ञान आर्थिक अवसरों में बदल सकता है।

वर्ष 2021 में स्थापित कोसाला छत्तीसगढ़ में कोसा रेशम की रीलिंग और बुनाई को पुनर्जीवित करने तथा कारीगरों की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है। संस्था के अनुसार, अब तक जांजगीर-चांपा, रायगढ़ और कोरबा जिलों के 18 गांवों में 1,100 से अधिक कारीगरों और समुदाय के सदस्यों तक पहुंच बनाई गई है।

कोसाला की ‘कारीगरी – क्राफ्टिंग स्किल्स, क्रिएटिंग लाइवलीहुड्स’ पहल के तहत देवरी गांव की 30 महिलाएं हाथ की कढ़ाई का अल्पकालिक प्रशिक्षण ले रही हैं। वहीं, करमंदा गांव में करघाग्राम पहल के अंतर्गत 20 महिलाओं को कोसा बुनाई से जोड़ा गया है। इनमें 10 अर्ध-कुशल महिलाएं और 10 पहली बार बुनाई सीख रही महिलाएं शामिल हैं। इस पहल में स्थानीय ग्राम पंचायत और सरपंच का सहयोग भी लिया गया है।

कोसाला के निदेशक सौरभ खेडेकर ने कहा कि पारंपरिक शिल्प का संरक्षण और सतत आजीविका के अवसर विकसित करना समावेशी विकास के महत्वपूर्ण पहलू हैं। वहीं, कोसाला लाइवलीहुड एंड सोशल फाउंडेशन की सीईओ नीता शाह ने प्रशिक्षण, सहयोग और बाजार के अवसरों के माध्यम से पारंपरिक कौशल को आजीविका का मजबूत माध्यम बनाने पर जोर दिया।

समारोह में डॉ. संगीता कापसे की संगीता कला अकादमी की छात्राओं राधिका शर्मा और गीतिका चक्रधर ने लखनऊ घराने की कथक शैली में प्रस्तुति दी। आयोजकों के अनुसार, कोसाला की पहल का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की कोसा बुनाई परंपरा को संरक्षित रखने के साथ वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाना है।

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