छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने लोकतंत्र में विरोध के अधिकार का सम्मान करने की बात कहते हुए अराजकता को अस्वीकार्य बताया है। रायगढ़ में मीडिया को दिए बयान में उन्होंने विपक्ष पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारत में बांग्लादेश और नेपाल जैसी स्थिति पैदा करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने के लिए कई वैधानिक मंच उपलब्ध हैं, ऐसे में विरोध की आड़ में अराजकता फैलाना उचित नहीं है।
ओपी चौधरी ने कहा कि भारत में हर पांच साल में चुनाव होते हैं और जनता चुनाव के माध्यम से सरकारों की जवाबदेही तय करती है। चुनाव के अलावा भी असहमति व्यक्त करने और अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए कानूनी तरीके उपलब्ध हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के विकल्प मौजूद हैं, तो अराजकता का रास्ता क्यों अपनाया जाए।
वित्त मंत्री ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता को नुकसान पहुंचाने वाला तरीका लोकतांत्रिक नहीं हो सकता। उन्होंने विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के लिए कानून-व्यवस्था को जरूरी बताया। उनके अनुसार, देश में आंतरिक शांति और स्थिरता रहने से निवेश को बढ़ावा मिलता है। उद्योगों की स्थापना से रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और युवाओं को लाभ मिलता है।
चौधरी ने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी दल विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारत में बांग्लादेश और नेपाल जैसी परिस्थितियां पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने इन देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां चुनी हुई सरकारों के गिरने से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। उनके मुताबिक, इसी तरह का मॉडल भारत में लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे देश की स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देशवासियों का एकजुट रहना जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से देश की स्थिरता बनाए रखने और विकास यात्रा में सहयोग करने की अपील की। चौधरी के अनुसार, भारत को विश्व शक्ति बनाने और विकसित राष्ट्र के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों पर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने दोहराया कि लोकतंत्र विरोध का अधिकार देता है, लेकिन अराजकता फैलाने का अधिकार नहीं देता।

