रायगढ़। गणेश चतुर्थी के पावन पर्व के साथ ही पूरा शहर गणपति बप्पा की भक्ति में रम गया। घरों से लेकर गली-मोहल्लों और प्रमुख चौराहों तक प्रथम पूज्य भगवान गणेश की स्थापना के साथ गणेशोत्सव की शुरुआत हुई। इसी कड़ी में नटवर स्कूल मैदान में महाराष्ट्र मंडल रायगढ़ ने अपनी 87 साल पुरानी गणेश स्थापना की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष 19 फीट ऊंची और करीब 3 टन वजनी गणपति प्रतिमा की भव्य स्थापना की।
शाम के शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद जैसे ही गणपति प्रतिमा के सामने से पर्दा हटाया गया, श्रद्धालु बप्पा के विराट और शांत स्वरूप को निहारते रह गए। स्वर्णिम अलंकरण और पुष्प सज्जा से सजे गणपति के दर्शन के साथ ही पूरा पंडाल ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से गूंज उठा। स्थापना के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आया।
महाराष्ट्र मंडल रायगढ़ के गणेशोत्सव की परंपरा शहर के इतिहास से जुड़ी हुई है। वर्ष 1939 में स्व. पीके तामस्कर, स्व. श्रीधर आठले, स्व. अनंत पत्की और स्व. साल्पेकर ने बूजी भवन में पहली बार गणपति स्थापना कर इस परंपरा की शुरुआत की थी। इसके बाद आयोजन ने शहर के अलग-अलग स्थानों से सफर तय किया। समय के साथ आयोजन की जिम्मेदारी नई पीढ़ियों के हाथों में आती गई।
वर्ष 2009 में महाराष्ट्र मंडल के गणेशोत्सव ने नटवर स्कूल मैदान का रुख किया। इसके बाद से नटवर स्कूल मैदान इस आयोजन की भव्यता का गवाह बन रहा है। समय के साथ गणेशोत्सव का स्वरूप और विस्तार बढ़ा, लेकिन भगवान गणेश की आराधना से जुड़ी आस्था की परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रही।
इस वर्ष स्थापित की गई विशाल गणपति प्रतिमा को पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर से आए मूर्तिकार सोमेन दोलाई ने तैयार किया है। बताया गया कि उन्होंने करीब डेढ़ महीने तक रायगढ़ में रहकर इस भव्य प्रतिमा को आकार दिया। मुख्य गणपति प्रतिमा के साथ रिद्धि-सिद्धि और मूषकराज की प्रतिमाओं को भी तैयार किया गया है।
आयोजन की एक विशेषता यह भी है कि यहां स्थापित सभी प्रतिमाएं इको-फ्रेंडली हैं। गणेशोत्सव में धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास भी किया गया है। प्रतिमा का निर्माण पूरा होने के बाद गणपति को इंदिरा नगर से बाजे-गाजे के साथ नटवर स्कूल मैदान तक लाया गया। इस दौरान रास्तेभर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच बप्पा का स्वागत किया गया और इसके बाद पूरे विधि-विधान से उन्हें पंडाल में विराजित किया गया।
भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य देवता का स्थान प्राप्त है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणपति की आराधना से करने की परंपरा रही है। नटवर स्कूल मैदान में भी पुजारी श्रीकर सकल कले के मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ गणपति स्थापना की प्रक्रिया पूरी की गई।
स्थापना के बाद प्रतिमा के सामने से पर्दा हटाए जाने का क्षण श्रद्धालुओं के लिए विशेष रहा। बप्पा के विराट स्वरूप के प्रथम दर्शन होते ही श्रद्धालुओं की नजरें प्रतिमा पर टिक गईं और लोगों ने हाथ जोड़कर भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया। इसके बाद पूरा नटवर स्कूल मैदान ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से गूंज उठा।
नटवर स्कूल मैदान में शुरू हुआ यह 12 दिवसीय गणेशोत्सव 25 सितंबर यानी अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। इन 12 दिनों के दौरान पंडाल में नियमित पूजा-अर्चना, महाआरती और प्रसाद वितरण का सिलसिला जारी रहेगा। आयोजन को सर्वसमावेशी रूप देने के लिए महाराष्ट्र मंडल की ओर से शहर के अलग-अलग सामाजिक संगठनों और समुदायों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि विभिन्न वर्गों के लोग महाआरती में शामिल होकर बप्पा का आशीर्वाद ले सकें।
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ गणेशोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। बाहर से आए कलाकारों द्वारा भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विसर्जन तक पंडाल में भक्तिमय वातावरण बनाए रखने की तैयारी है।
मंडल के सदस्य दिलीप मोडक के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक कई प्रमुख जनप्रतिनिधि महाराष्ट्र मंडल के गणपति पंडाल में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे हैं। इस वर्ष भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पंडाल में पहुंचने की जानकारी दी गई है।
रायगढ़ विधायक एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी भी पिछले दो-तीन वर्षों से विधायक के रूप में नियमित रूप से यहां गणपति दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इनके अलावा रायगढ़ शहर के गणमान्य नागरिक, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि और प्रबुद्धजन भी बड़ी संख्या में पंडाल में पहुंचकर बप्पा के दर्शन कर रहे हैं।
शाम ढलने के साथ ही नटवर स्कूल मैदान दूधिया और रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा। रोशनी से सजे पंडाल और फूलों से सुसज्जित गणपति दरबार ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। महाआरती के दौरान घंटियों की गूंज और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय नजर आया।

