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करमागढ़ के मां मानकेश्वरी मंदिर में शरद पूर्णिमा पर निभाई गई बलि प्रथा की परंपरा

रायगढ़। जिले के करमागढ़ स्थित मां मानकेश्वरी मंदिर में शरद पूर्णिमा के अवसर पर पारंपरिक बलि प्रथा का निर्वहन किया गया। धार्मिक आयोजन में राज परिवार के सदस्यों की उपस्थिति रही। इस परंपरा को देखने के लिए रायगढ़ जिले के विभिन्न गांवों के साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में लोगों की भीड़ रही। वहीं, गांव में मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के लिए गांव के बाहर स्थित मुख्य प्रवेश द्वार पर राज परिवार के सदस्यों कुंवर देवेंद्र प्रताप सिंह, उर्वासी देवी, त्रिशिवम प्रताप सिंह सहित अन्य सदस्यों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। इसके बाद उन्हें सम्मानपूर्वक मां मानकेश्वरी मंदिर परिसर में लाया गया। मंदिर में पूजा-अर्चना के पश्चात पारंपरिक बलि प्रथा की शुरुआत हुई।

आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा लाए गए दर्जनों बकरों की बलि दी गई। इसके बाद परंपरा के अनुसार रक्तपान की रस्म निभाई गई। आगे की धार्मिक प्रक्रिया में बाजे-गाजे के साथ बैगा ने पारंपरिक स्वरूप में गांव का भ्रमण किया। भ्रमण के बाद मंदिर परिसर लौटने पर बलि प्रथा से जुड़ी रस्मों का समापन हुआ। धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद राज परिवार के सदस्यों को पारंपरिक सम्मान के साथ विदाई दी गई।

इस अवसर पर मन्नत पूरी होने पर महिलाओं द्वारा दंडवत प्रणाम करने की परंपरा भी देखने को मिली। मान्यता के अनुसार, कई महिलाएं बाल खोलकर दंडवत प्रणाम करती नजर आईं। श्रद्धालुओं ने मां मानकेश्वरी के प्रति अपनी आस्था प्रकट की और धार्मिक आयोजन में भाग लिया।

शरद पूर्णिमा के अवसर पर सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। रायगढ़ जिले के अलावा ओडिशा से पहुंचे लोगों के कारण करमागढ़ में पूरे दिन चहल-पहल रही। गांव में आयोजित मेले में भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मां मानकेश्वरी मंदिर में आयोजित यह कार्यक्रम क्षेत्र की पारंपरिक मान्यताओं, स्थानीय संस्कृति और ऐतिहासिक धार्मिक परंपराओं से जुड़ा रहा।

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