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श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया नुआखाई पर्व, घर-घर गूंजा नवान्न और ‘जुहार’

रायगढ़। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में नुआखाई पर्व श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। नई फसल के स्वागत और उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाले इस पर्व पर घर-घर नवान्न की परंपरा निभाई गई। लोगों ने नए धान से तैयार नवान्न को देवी-देवताओं को अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर एक-दूसरे को ‘नुआखाई जुहार’ दी गई।

नुआखाई को किसानों और नई फसल के सम्मान से जुड़ा प्रमुख पर्व माना जाता है। पर्व के अवसर पर सुबह से ही घरों और मंदिरों में विशेष तैयारियां की गईं। नई फसल से तैयार किए गए नवान्न को विधि-विधान के साथ देवी-देवताओं को अर्पित किया गया। पूजा-अर्चना के बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया गया। परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटी और बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया।

नुआखाई के मौके पर घरों में पारंपरिक पकवान बनाए गए। लोगों ने नए वस्त्र धारण किए और रिश्तेदारों तथा परिचितों से मुलाकात कर पर्व की शुभकामनाएं दीं। एक-दूसरे को ‘नुआखाई जुहार’ देने की परंपरा के साथ पर्व का उल्लास घर-परिवार से लेकर सामाजिक स्तर तक देखने को मिला।

पर्व को लेकर बाजारों में भी रौनक रही। लोग पर्व की तैयारियों के लिए आवश्यक सामग्री और अन्य सामान की खरीदारी करते नजर आए। घरों में पारंपरिक व्यंजनों की तैयारी के साथ परिवार के लोगों ने मिलकर पर्व मनाया। लंबे समय से चली आ रही परंपराओं के बीच नई फसल का स्वागत किया गया।

पश्चिमी ओडिशा की संस्कृति से जुड़े नुआखाई पर्व की छत्तीसगढ़ में भी विशेष पहचान है। छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में ओडिशा की सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े परिवार और समुदाय इस पर्व को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाते हैं। इस दौरान नई फसल को सबसे पहले देवी-देवताओं को अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है।

नुआखाई केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व नहीं, बल्कि कृषि, प्रकृति, परिवार और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक माना जाता है। नई फसल के माध्यम से प्रकृति और कृषि से जुड़े श्रम के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। किसान और परिवार अच्छी फसल के लिए आभार जताते हुए आने वाले वर्ष में भी सुख-समृद्धि और बेहतर कृषि उत्पादन की कामना करते हैं।

पर्व के दौरान परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने और छोटों को स्नेह देने की परंपरा भी निभाई गई। ‘नुआखाई जुहार’ के माध्यम से रिश्तों में अपनापन और सामाजिक सद्भाव की भावना को मजबूत किया गया। कई परिवारों में रिश्तेदारों और परिचितों के साथ मिलकर पारंपरिक तरीके से नवान्न ग्रहण किया गया।

नुआखाई के समापन अवसर पर भी लोगों में पर्व को लेकर उत्साह बना रहा। घरों में पूजा-पाठ और पारंपरिक पकवानों के बाद परिवार के सदस्यों ने साथ बैठकर भोजन किया। नई फसल के स्वागत के साथ लोगों ने परिवार की खुशहाली, अच्छी फसल और समृद्धि की कामना की।

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