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छत्तीसगढ़ में लैंड यूज नियमों में बदलाव, जमीन पर कारोबार के विकल्प बढ़े

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग यानी लैंड यूज को लेकर नियमों में किए गए बदलाव को लेकर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के रिफॉर्म एजेंडा के तहत भूमि के बेहतर उपयोग और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए राज्य में भी सुधार लागू किए गए हैं। उनके अनुसार, इन बदलावों का उद्देश्य जमीन के उपयोग से जुड़ी पुरानी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और लोगों को अपनी भूमि का अधिक प्रभावी तरीके से उपयोग करने की सुविधा देना है।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां प्रति व्यक्ति भूमि की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने विभिन्न देशों की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर भूमि उपयोग से जुड़े सुधारों का एजेंडा तैयार किया है। ओपी चौधरी के मुताबिक, 1970 और 1980 के दशक में सोशलिस्ट और कम्युनिस्ट देशों की व्यवस्थाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए कई सख्त नियमों में अब बदलाव किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इन सुधारों को लागू किया जा रहा है और इसी दिशा में छत्तीसगढ़ ने भी कदम बढ़ाया है। वित्त मंत्री के अनुसार, नए प्रावधानों से भूमि उपयोग को लेकर लोगों के सामने मौजूद कई तरह के भ्रम दूर होंगे और अलग-अलग आर्थिक गतिविधियों के लिए भूमि के उपयोग के विकल्प बढ़ेंगे।

ओपी चौधरी ने बताया कि नए सुधारों के तहत रेजिडेंशियल जमीन पर कमर्शियल गतिविधियों की अनुमति से जुड़े प्रावधान किए गए हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी कॉलोनी का लेआउट पहले से रेजिडेंशियल उपयोग के आधार पर स्वीकृत है, तो वहां बाद में कमर्शियल गतिविधि शुरू नहीं की जा सकेगी। यानी पहले से स्वीकृत रेजिडेंशियल लेआउट के उपयोग को बदलने की अनुमति नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास नई यानी फ्रेश जमीन है और मास्टर प्लान में उसका लैंड यूज रेजिडेंशियल निर्धारित है, तो नए प्रावधानों के तहत उसका कमर्शियल उपयोग किया जा सकेगा। इसी तरह कमर्शियल जमीन पर रेजिडेंशियल निर्माण की अनुमति भी दी जा सकेगी। वित्त मंत्री ने इसे ऐसे पुराने शहरी मॉडल से जोड़ते हुए बताया, जिसमें एक ही भवन के नीचे दुकान और ऊपर आवास जैसी व्यवस्था होती थी।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार लेआउट स्वीकृत हो जाने के बाद उसके निर्धारित उपयोग को बाद में मनमाने तरीके से बदला नहीं जा सकेगा। इस तरह नए और पहले से स्वीकृत लेआउट के बीच अंतर को बनाए रखा गया है।

वित्त मंत्री के अनुसार, इंडस्ट्रियल एरिया में भी भूमि उपयोग के दायरे को विस्तारित किया गया है। अब औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए आवास जैसी सुविधाएं विकसित करने की अनुमति से जुड़े प्रावधान किए गए हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग प्रकार की गतिविधियों को भूमि उपयोग के दायरे में शामिल करने से औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

उन्होंने एग्रीकल्चर लैंड को लेकर चल रहे भ्रम को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। ओपी चौधरी ने कहा कि कृषि भूमि में नेगेटिव लिस्ट से संबंधित प्रावधान केवल मास्टर प्लान क्षेत्र के लिए लागू है। मास्टर प्लान क्षेत्र से बाहर की कृषि भूमि पर यह नियम लागू नहीं होता। उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर लोगों के बीच भ्रम और अफवाह की स्थिति बनी हुई थी, जिसे स्पष्ट किया गया है।

सोलर प्रोजेक्ट को लेकर भी वित्त मंत्री ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कृषि भूमि उपयोग पर सोलर लगाया जा सकेगा। उनके अनुसार, अब नेगेटिव लिस्ट में शामिल गतिविधियों को छोड़कर अन्य गतिविधियां लोग अपनी जमीन पर कर सकेंगे। इससे कृषि भूमि के वैकल्पिक उपयोग से जुड़े विकल्प भी बढ़ने की बात उन्होंने कही।

ओपी चौधरी ने कहा कि ये बदलाव भारत सरकार के व्यापक रिफॉर्म एजेंडा का हिस्सा हैं। उनके मुताबिक, भूमि के उपयोग को अधिक लचीला बनाने से लोगों को अपनी संपत्ति का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलेगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।

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