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रील बनाने के चक्कर में गजराजों के करीब पहुंचे युवक

वन विभाग की सतर्क निगरानी से टला बड़ा हादसा, ड्रोन फुटेज में कैद हुई पूरी घटना, पहचान होते ही मौके से भागे

रायगढ़। छाल परिक्षेत्र में 52 हाथियों के विशाल दल की निगरानी के दौरान वन विभाग की सतर्क ड्रोन मॉनिटरिंग ने एक बड़ी लापरवाही को समय रहते पकड़ लिया, जिससे संभावित बड़ा जनहानि का हादसा टल गया। वन्यजीवों की मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद युवक आरक्षित वन क्षेत्र में घुसकर दंतैल हाथी के नजदीक पहुंचने का प्रयास कर रहे थे। उनकी खतरनाक हरकतें ड्रोन कैमरे में कैद हो गईं। मामले को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
वन मंडलाधिकारी धरमजयगढ़ ने बताया कि उक्त घटना 28 मई की शाम की है, जब छाल परिक्षेत्र के एडू संगम क्षेत्र के समीप 52 हाथियों के विशाल दल की गतिविधियों पर वन विभाग ड्रोन कैमरे से लगातार निगरानी कर रहा था। हाथियों के इस बड़े झुंड में कई मादा हाथियों के साथ शावक भी मौजूद थे, वहीं एक आक्रामक नर दंतैल हाथी भी दल के आसपास विचरण कर रहा था। इसी दौरान ड्रोन कैमरे में एक लाल रंग की मोटरसाइकिल पर सवार तीन युवक आरक्षित वन क्षेत्र की ओर जाते दिखाई दिए। वन अमले की मनाही और खतरे की जानकारी होने के बावजूद वे चोरी-छिपे जंगल के भीतर प्रवेश कर गए। कुछ दूरी आगे बढऩे के बाद दो अन्य युवक भी उनके साथ जुड़ गए और सभी हाथियों की दिशा में बढऩे लगे।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिस रास्ते से युवक आगे बढ़ रहे थे, उसी मार्ग के समीप हाथियों का विशाल दल मौजूद था। स्थिति उस समय और भी गंभीर हो गई जब दल से अलग होकर एक विशाल नर दंतैल हाथी युवकों की दिशा में वापस मुडऩे लगा। इसके बावजूद युवक हाथी के अत्यंत करीब पहुंचने का प्रयास करते रहे। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि वे वीडियो बनाने, फोटो खींचने अथवा सोशल मीडिया पर दिखावे के लिए हाथियों के नजदीक जाने का प्रयास कर रहे थे। ड्रोन कैमरे की लाइव मॉनिटरिंग कर रहे वन अधिकारियों ने जैसे ही युवकों की गतिविधियां देखीं, तुरंत स्थिति पर नजर बनाए रखी। कुछ ही देर बाद जब ड्रोन कैमरा युवकों के ऊपर पहुंचा तो उन्हें अपनी पहचान उजागर होने का अंदेशा हुआ और वे घबराकर मौके से भाग निकले। वन विभाग का मानना है कि यदि कुछ मिनट और देरी होती तो हाथी का हमला किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था। विभाग की त्वरित निगरानी और सतर्कता ने संभावित जनहानि को टाल दिया।
वन विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। अधिकारियों के अनुसार आरक्षित वन क्षेत्र में अनाधिकृत रूप से प्रवेश करना भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26(1)(डी) का उल्लंघन है। इसके अलावा वन्यजीवों का पीछा करना, उन्हें उकसाना अथवा उनके प्राकृतिक व्यवहार में बाधा उत्पन्न करना भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत दंडनीय अपराध है। वन विभाग ने अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया है तथा इसकी सूचना थाना छाल को भी भेज दी गई है। ड्रोन फुटेज और उपलब्ध फोटोग्राफिक साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध युवकों की पहचान कर ली गई है और उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वन अधिकारियों ने बताया कि घटना से संबंधित वीडियो और फोटो विभाग के पास सुरक्षित हैं तथा मामले की विस्तृत जांच जारी है। दोषियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
वन विभाग की चेतावनी
वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि हाथियों और अन्य वन्यजीवों के विचरण क्षेत्र में प्रवेश न करें तथा रोमांच, सेल्फी या वीडियो बनाने के लिए वन्यजीवों के करीब जाने की कोशिश न करें। ऐसी हरकतें न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि स्वयं के जीवन और वन्यजीवों दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी हाथियों एवं अन्य वन्यप्राणियों को परेशान करने, उनका पीछा करने या उनके प्राकृतिक आवास में हस्तक्षेप करने वालों के खिलाफ ड्रोन निगरानी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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