रायगढ़। प्रखर समाजवादी नेता नंदन गुप्ता का सोमवार सुबह निधन हो गया। 80 वर्षीय गुप्ता लंबे समय से बीमार चल रहे थे और मेट्रो बालाजी अस्पताल में उनका उपचार जारी था। उन्हें बीते 13 तारीख को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी अंतिम यात्रा मंगलवार सुबह बोईरदादर स्थित उनके निवास से निकाली जाएगी। उनके निधन से जिले के समाजवादी आंदोलन से जुड़े लोगों में शोक है।
नंदन गुप्ता अपने पीछे दो पुत्र, दो पुत्रियों और नाती-पोतों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। वे रेफ्रिजरेशन और रेडियो मैकेनिक के रूप में कार्य करते थे, लेकिन सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही। समाजवादी विचारधारा से जुड़े गुप्ता ने अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान वर्ष 1993 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। इसके बाद वर्ष 1998 में उन्होंने लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव में भाग लिया।
रायगढ़ जिले में औद्योगीकरण के कारण जल, जंगल और जमीन पर पड़ने वाले प्रभावों के मुद्दे पर भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्व विधायक स्वर्गीय रामकुमार अग्रवाल, स्वर्गीय शशिकांत शर्मा, राजकुमार गुप्ता, जयंत बोहिदार सहित अन्य समाजवादी नेताओं के साथ मिलकर स्थानीय स्तर पर संघर्ष किया।
वर्ष 1997 में केलो नदी का पानी जिंदल उद्योग समूह को दिए जाने के विरोध में चले आंदोलन में भी नंदन गुप्ता की सक्रिय भागीदारी रही। इसी आंदोलन के दौरान बोंदाटिकरा निवासी सत्यभामा सौंरा की आमरण अनशन के दौरान मृत्यु हो गई थी। इस मामले में आंदोलन में शामिल नंदन गुप्ता सहित आधा दर्जन से अधिक नेताओं के खिलाफ उद्योग समूह की ओर से प्रकरण दर्ज कराए गए थे।
नंदन गुप्ता ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मामा बनारसी के नेतृत्व में भी कई आंदोलनों में हिस्सा लिया था। उन्हें आम लोगों पर होने वाले कथित अत्याचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले जमीनी नेता के रूप में याद किया जाता है। उनके निधन को जिले के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया गया है।

