रायगढ़। जिले के लैलूंगा विकासखंड के ग्राम खैरबहर निवासी प्रगतिशील किसान भवानी शंकर पंडा को रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित ‘चौधरी मित्रसेन समिति कृषक सम्मान’ कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। 24 अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने उन्हें सम्मान प्रदान किया। कार्यक्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त, संचालक कृषि सहित विभागीय अधिकारी और प्रदेशभर से आए किसान उपस्थित रहे।
भवानी शंकर पंडा जैविक खेती के साथ देशी धान की 105 किस्मों के संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। पारंपरिक धान की किस्मों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उन्होंने धान संग्रहालय तैयार किया है। यहां विभिन्न किस्मों के बीजों को संरक्षित करने के साथ छोटे-छोटे भूखंडों में उनकी खेती भी की जाती है। इसके माध्यम से बीजों का संवर्धन किया जा रहा है, ताकि पारंपरिक धान की किस्मों को सहेजने के प्रयास जारी रह सकें।
किसान पंडा खेती में विविधता लाने के लिए भी प्रयासरत हैं। उन्होंने धान के स्थान पर तिल की खेती कर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया है। इस वर्ष वे सात एकड़ क्षेत्र में सुगंधित जवाफूल धान की खेती कर रहे हैं। जैविक खेती, देशी बीजों के संरक्षण और अलग-अलग फसलों को अपनाने की दिशा में उनके प्रयासों को कृषि क्षेत्र में नवाचार से जोड़कर देखा जा रहा है।
देशी धान की 105 किस्मों को संरक्षित करने के लिए बनाया गया उनका धान संग्रहालय पारंपरिक कृषि ज्ञान को सहेजने का माध्यम है। यहां बीजों को सुरक्षित रखने के साथ उनकी खेती और संवर्धन पर भी काम किया जा रहा है। इससे पारंपरिक किस्मों को आगे बढ़ाने के प्रयासों को निरंतरता मिलती है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में भवानी शंकर पंडा को सम्मानित किया जाना उनके कृषि कार्यों की पहचान के रूप में सामने आया है। जैविक खेती, पारंपरिक धान संरक्षण और फसल विविधीकरण के जरिए वे अपने खेतों में कृषि की विभिन्न पद्धतियों को अपना रहे हैं।

