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रायगढ़ के तिलगा में रिजर्व फॉरेस्ट पर कब्जे का आरोप, मुनारे और पेड़ों को नुकसान की शिकायत

रायगढ़ जिले के तिलगा में जमीन के समतलीकरण को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने दीपक डोरा पर निजी भूमि से लगी शासकीय जमीन और रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में कथित अतिक्रमण करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि इस दौरान वन विभाग द्वारा जंगल की सीमा दर्शाने के लिए लगाए गए मुनारों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा साल और सागौन के पेड़ काटने, कुछ पेड़ों को नाले में डालने और शासकीय भूमि पर फ्लाई ऐश पटवाने की कथित धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों के अनुसार, खसरा नंबर 644/2 की 1.0970 हेक्टेयर भूमि विमला देवी अग्रवाल, पति प्रमोद अग्रवाल, तथा कमल कुमार अग्रवाल के नाम पर दर्ज है। आरोप है कि इस जमीन पर समतलीकरण कराया जा रहा है और आसपास की शासकीय बड़े झाड़ जंगल की भूमि तथा रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में भी कथित तौर पर दखल बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, भूमि की वास्तविक सीमा और वन क्षेत्र की स्थिति राजस्व अभिलेखों, वन नक्शों तथा मौके के निरीक्षण से ही स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों ने जंगल की सीमा दर्शाने वाले मुनारों को नुकसान पहुंचाने की शिकायत भी की है। उनका कहना है कि यदि सीमा-चिह्नों को क्षति पहुंचाई गई है, तो इससे वनभूमि के सीमांकन और सुरक्षा से जुड़ा मामला गंभीर हो सकता है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मौके पर निरीक्षण कर मुनारों की स्थिति दर्ज करने की मांग की है।

इसके अलावा, क्षेत्र में साल और सागौन के पेड़ गिराए जाने तथा कुछ पेड़ों को नाले में डालने का आरोप लगाया गया है। इन दावों की पुष्टि के लिए कथित कटाई वाले स्थानों, पेड़ों के ठूंठ, लकड़ी के अवशेष और भूमि की सीमाओं की जांच जरूरी है। ग्रामीणों ने शासकीय जमीन पर फ्लाई ऐश पटवाने की कथित धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया है।

ग्रामीण जिला प्रशासन और वन विभाग से शिकायत करने की तैयारी में हैं। उनकी मांग है कि संबंधित खसरे का सीमांकन कराया जाए और आसपास की शासकीय तथा रिजर्व फॉरेस्ट भूमि की पहचान कराई जाए। साथ ही, कथित अतिक्रमण, मुनारों को नुकसान और पेड़ों की कटाई की निष्पक्ष जांच हो। आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

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