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 विवादित जमीन पर बाउंड्रीवॉल निर्माण का आरोप, किसान ने मांगा दोबारा सीमांकन

रायगढ़। छातामुड़ा-बांजीपाली सीमा पर स्थित विवादित जमीन को लेकर राजस्व विवाद गहरा गया है। फत्तेचंद पटेल और कैलाश आचार्य ने आरोप लगाया है कि तहसील न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद संबंधित भूमि पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण शुरू कर दिया गया। पीड़ित पक्ष ने सीमांकन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन से दोनों गांवों की सीमाओं का मिलान कर संयुक्त रूप से दोबारा सीमांकन कराने की मांग की है।

फत्तेचंद पटेल के अनुसार, नितेश अग्रवाल ने जमीन पर कब्जा नहीं मिलने का हवाला देते हुए तहसीलदार न्यायालय में परिवाद दायर किया था। इसके बाद फत्तेचंद पटेल और कैलाश आचार्य को नोटिस जारी किए गए। पटेल का दावा है कि संबंधित भूमि उनकी पैतृक संपत्ति है और प्रकरण न्यायालय में लंबित होने के दौरान बाउंड्रीवॉल का निर्माण शुरू किया गया। उन्होंने निर्माण की वैधता पर सवाल उठाते हुए मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पीड़ित पक्ष ने पूर्व में कराए गए सीमांकन पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सीमांकन के समय बारिश, कीचड़, झाड़ियों और पानी भरे गड्ढों के कारण जमीन की सही नपाई प्रभावित हो सकती थी। पटेल के मुताबिक, उन्होंने मौके पर पंचनामे को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी और न्यायालय में लिखित आवेदन देकर शुष्क मौसम में दोनों पक्षों की मौजूदगी में दोबारा सीमांकन कराने की मांग की थी।

कैलाश आचार्य ने विवादित जमीन के खसरा नंबर 155/2 का उल्लेख करते हुए दावा किया कि सीमांकन में इसका कुछ हिस्सा छातामुड़ा और कुछ हिस्सा बांजीपाली में दर्शाया गया है। उन्होंने इसे राजस्व अभिलेखों और सीमांकन प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर सवाल बताया। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित खसरा नंबर 156 की शासकीय भूमि को भी बाउंड्रीवॉल के दायरे में शामिल किए जाने की आशंका है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

पीड़ित पक्ष के अनुसार, शिकायत के बाद तहसीलदार के हस्तक्षेप से मौके पर चल रहा निर्माण कार्य रुकवाया गया। हालांकि, उनका कहना है कि निर्माण पर रोक के संबंध में लिखित आदेश जारी किया जाना चाहिए, ताकि न्यायालय के निर्णय तक विवादित स्थल की स्थिति में बदलाव न हो।

फत्तेचंद पटेल और कैलाश आचार्य ने दोनों क्षेत्रों के सक्षम राजस्व अधिकारियों, राजस्व निरीक्षकों और पटवारियों की संयुक्त टीम बनाकर पारदर्शी तरीके से सीमांकन कराने की मांग की है। मामले में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और नितेश अग्रवाल का पक्ष उपलब्ध नहीं है। न्यायालय में लंबित विवाद और जमीन की वास्तविक स्थिति पर अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी के अभिलेखों और निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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