रायगढ़। किरोड़ीमल नगर स्थित सेठ किरोड़ीमल धर्मादा न्यास की भूमि पर काबिज लोगों के दस्तावेजों की शुक्रवार को उच्च स्तरीय जांच समिति ने जांच की। अपर जिला दंडाधिकारी अपूर्व प्रियेश टोप्पो की अध्यक्षता में हुई इस कार्रवाई में भूमि पर आधिपत्य के आधार, कब्जे की अवधि और किराया भुगतान से जुड़े तथ्यों का परीक्षण किया गया। समिति ने संबंधित व्यक्तियों के मूल दस्तावेजों का राजस्व अभिलेखों और स्थल जांच प्रतिवेदन में दर्ज विवरण से मिलान किया। जांच पूरी होने के बाद समिति अपना प्रतिवेदन जिला प्रशासन को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
यह कार्रवाई ग्राम कोकड़ीतराई और किरोड़ीमल नगर स्थित न्यास की भूमि पर काबिज व्यक्तियों के आधिपत्य से जुड़े मामलों में की गई। शुक्रवार सुबह 11 बजे मुख्य नगर पालिका अधिकारी कार्यालय, किरोड़ीमल नगर में सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई। सूचना पत्र में उल्लेखित संबंधित व्यक्ति निर्धारित समय पर उपस्थित हुए। समिति ने प्रत्येक व्यक्ति को क्रमवार बुलाकर उनके कब्जे और भूमि से संबंधित दस्तावेजों की जांच की।
सत्यापन के दौरान भूमि की रजिस्ट्री, किरायानामा, विक्रय रसीद, किराया भुगतान की रसीद, संपत्ति कर की रसीद, बिजली बिल और पहचान पत्रों का परीक्षण किया गया। मूल दस्तावेजों से मिलान के बाद स्वप्रमाणित छायाप्रतियां प्रकरण के अभिलेख में शामिल की गईं। समिति ने दस्तावेजों में दर्ज विवरण की तुलना संबंधित खसरा नंबर, काबिज रकबे और स्थल जांच प्रतिवेदन से भी की, ताकि भूमि पर आधिपत्य से जुड़े तथ्यों का अभिलेखों के आधार पर परीक्षण किया जा सके।
जांच समिति में नगर निगम रायगढ़ के आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय, वरिष्ठ कोषालय अधिकारी चंद्रपाल सिंह ठाकुर और नायब तहसीलदार हरनंदन बंजारे शामिल रहे। संयुक्त राजस्व जांच दल के राजस्व निरीक्षक और संबंधित हल्का पटवारी भी मूल जांच प्रतिवेदन, सीमांकन पंचनामा, भूमि के अभिन्यास तथा अन्य राजस्व अभिलेखों के साथ उपस्थित थे। इन दस्तावेजों के आधार पर भूमि की स्थिति और संबंधित व्यक्तियों के दावों का मिलान किया गया।
समिति ने सत्यापन के दौरान संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया। उनसे पूछा गया कि वे भूमि पर कब से काबिज हैं, उन्हें भूमि किस आधार पर प्राप्त हुई और किराये का भुगतान किसे किया जाता था। उनके कथन दर्ज किए गए और आधिपत्य से जुड़े दावों के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेजों की जानकारी ली गई। गोपाल ट्रेडिंग कंपनी को किराया देने की बात कहने वाले व्यक्तियों से संबंधित रसीदें और अन्य विवरण भी प्राप्त किए गए।
अपर जिला दंडाधिकारी अपूर्व प्रियेश टोप्पो ने बताया कि जिला प्रशासन ने इस प्रकरण में एकपक्षीय कार्रवाई करने के बजाय संबंधित लोगों को पहले सूचना देकर दस्तावेज प्रस्तुत करने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य न्यास की धर्मार्थ भूमि को सुरक्षित रखना और उसके नाम पर आम नागरिकों से अनधिकृत किराया वसूली जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है।
प्रशासन के अनुसार, इस मामले में लंबे समय से निवास कर रहे परिवारों, छोटे दुकानदारों और ठेला व्यवसायियों के पक्ष को भी सुना जा रहा है। उनके दावों और प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण कर अभिलेखों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जांच के दौरान किसी व्यक्ति के आधिपत्य को लेकर अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है। समिति पहले सभी संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध राजस्व अभिलेखों का विस्तृत मिलान करेगी।
समिति प्रस्तुत दस्तावेजों की तुलना न्यास के अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड से करने के बाद अपना प्रतिवेदन जिला प्रशासन को सौंपेगी। इसके बाद भूमि पर आधिपत्य से जुड़े मामलों में उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। जांच का अंतिम परिणाम समिति की रिपोर्ट और अभिलेखों के परीक्षण के बाद सामने आएगा।

