बैगिन्डी में झारा शिल्प कला को मिलेगा नया आयाम, कारीगरों की आजीविका मजबूत करने पर जोर,जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय ने कारीगरों को आधुनिक मार्केटिंग और सोशल मीडिया से जुड़ने की दी सलाह, कलेक्टर के प्रयासों से कार्यशाला भवन का हुआ रिनोवेशन
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**सारंगढ़-बिलाईगढ़।** ग्राम पंचायत बैगिन्डी में पारंपरिक झारा शिल्प कला को बढ़ावा देने तथा इससे जुड़े कारीगरों की आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के माध्यम से झारा शिल्प कला के कारीगरों को अपनी कलाकृतियां तैयार करने के लिए कार्यशाला भवन उपलब्ध कराया गया है। कलेक्टर महोदया के प्रयासों से भवन का रिनोवेशन भी कराया गया है, जिससे कारीगरों को अपने पारंपरिक हुनर को निखारने और बेहतर तरीके से काम करने के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके।
बैगिन्डी की झारा शिल्प कला अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यहां के कारीगरों द्वारा तैयार की जाने वाली कलाकृतियां दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक पहुंच रही हैं। यह न केवल क्षेत्र की समृद्ध पारंपरिक कला और संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय कारीगरों के लिए आजीविका और स्वरोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन भी है।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय ने कारीगरों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि बैगिन्डी की झारा शिल्प कला में अपार संभावनाएं हैं। आवश्यकता इस बात की है कि इस पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप प्रस्तुत किया जाए और अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने कारीगरों से अपील की कि वे अपनी कलाकृतियों की आकर्षक तस्वीरें और वीडियो बनाकर यूट्यूब, इंस्टाग्राम तथा अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करें। इसके साथ ही कलाकृतियों की बेहतर सजावट, आकर्षक पैकेजिंग, गुणवत्तापूर्ण प्रस्तुति और प्रभावी मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दें, ताकि उनकी कला को व्यापक पहचान मिले और उत्पादों की मांग बढ़े।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि आज डिजिटल माध्यमों के जरिए स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। यदि पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और बेहतर मार्केटिंग से जोड़ा जाए, तो कारीगरों की आमदनी में वृद्धि हो सकती है और उनकी कला को नई पहचान मिल सकती है।
उन्होंने कारीगरों को आश्वस्त करते हुए कहा कि **झारा शिल्प कला को आगे बढ़ाने और इससे जुड़े परिवारों के रोजगार को मजबूत करने के लिए जिला पंचायत के माध्यम से हरसंभव सहयोग का प्रयास किया जाएगा।** इस दिशा में कलेक्टर महोदया के सहयोग और मार्गदर्शन से भी आवश्यक पहल की जाएगी, ताकि स्थानीय कारीगर आत्मनिर्भर बनें और उनकी पारंपरिक कला निरंतर आगे बढ़ती रहे।
बैगिन्डी की झारा शिल्प कला को संरक्षण देने के साथ-साथ उसे आधुनिक बाजार से जोड़ने की यह पहल स्थानीय हस्तशिल्प को नई दिशा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

