रायगढ़, पुसौर विकासखंड में प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों की बुनियादी शैक्षणिक दक्षताओं को मजबूत करने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्राथमिक शाला बोदाटिकरा में आयोजित शनिवारिय बैठक-सह-प्रशिक्षण में संयुक्त संकुल गढ़उमरिया, डूमरमुड़ा और छातामुरा के कक्षा तीसरी, चौथी और पांचवीं में गणित पढ़ाने वाले 22 शिक्षक शामिल हुए। प्रशिक्षण में गणितीय समझ, संख्या ज्ञान, पहाड़े, गतिविधि आधारित शिक्षण और कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपचारात्मक शिक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
गणितीय समझ मजबूत करने पर जोर
विकासखंड शिक्षा अधिकारी भुवनेश्वर पटेल ने प्रशिक्षण के दौरान राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2005 के उद्देश्यों और बच्चों में गणितीय क्षमता विकसित करने के तरीकों पर चर्चा की। शिक्षकों को बताया गया कि कक्षा-कक्ष की गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में मूलभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। गणितीय मॉडल और शिक्षण-अधिगम सामग्री का इस्तेमाल कर कठिन अवधारणाओं को बच्चों के लिए सरल बनाने और उनकी सहभागिता बढ़ाने के तरीके भी समझाए गए।
कमजोर बच्चों के लिए उपचारात्मक शिक्षण
प्रशिक्षण में बच्चों के सीखने के स्तर पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। जिन विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर कक्षा के अनुरूप नहीं है, उनके लिए उपचारात्मक शिक्षण की व्यवस्था करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने शिक्षकों से बच्चों की वास्तविक सीखने की स्थिति को पहचानकर उसी के अनुसार अतिरिक्त अभ्यास और गतिविधियां कराने को कहा, ताकि बुनियादी दक्षताओं में सुधार किया जा सके।
20 तक पहाड़े का लक्ष्य
कक्षा तीसरी से पांचवीं के विद्यार्थियों के लिए 20 तक पहाड़े याद कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ हिंदी पाठ्यपुस्तक का आदर्श पठन और तीन अंकों की संख्याओं के गुणनखंड एवं भाग की समझ विकसित करने पर भी जोर दिया गया। कक्षा पहली और दूसरी के बच्चों के लिए नियमित रूप से बारहखड़ी का अभ्यास कराने के निर्देश दिए गए हैं। इन निर्धारित लक्ष्यों को 31 अगस्त तक पूरा करने के लिए कहा गया है।
समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने के निर्देश
विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों को शाला समय में नियमित और समय पर उपस्थित रहने तथा वीएसके एप पर उपस्थिति दर्ज करने के निर्देश दिए। साथ ही पाठ्यक्रम विभाजन के अनुसार समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने और प्रधान पाठकों को नियमित रूप से कक्षाओं की निगरानी करने के लिए कहा गया। कक्षा में बच्चों में अपेक्षित सीखने के प्रतिफल विकसित हो रहे हैं या नहीं, इसकी भी निगरानी करने पर जोर दिया गया।
दैनंदिनी के अनुसार होगा अध्यापन
शिक्षकों को प्रतिदिन दैनंदिनी लिखने और उसमें निर्धारित योजना के अनुसार कक्षा-कक्ष में अध्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता लगातार बेहतर बनाने पर जोर देते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों को विद्यार्थियों और अभिभावकों की पसंद बनाने के लिए शैक्षणिक वातावरण में सुधार जरूरी है।
सरकारी स्कूलों में बढ़े प्रवेश
प्रशिक्षण के दौरान निजी विद्यालयों की ओर जाने वाले बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने और उन्हें शासकीय विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के लिए विशेष प्रयास करने की बात कही गई। इसके लिए केवल नामांकन बढ़ाने के बजाय बच्चों के सीखने के स्तर और विद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
बैगलेस दिवस में प्रतियोगी परीक्षाएं
शनिवार को बैगलेस दिवस के दौरान विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक गतिविधियों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के निर्देश भी दिए गए। विद्यार्थियों को नवोदय, एकलव्य, प्रयास, राष्ट्रीय साधन-सह-प्रावीण्य छात्रवृत्ति और उत्कर्ष परीक्षा जैसी परीक्षाओं के लिए नियमित रूप से तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।
तीन संकुल के 22 शिक्षक शामिल
प्रशिक्षण में गढ़उमरिया, डूमरमुड़ा और छातामुरा संकुल के 22 शिक्षक शामिल हुए। संकुल समन्वयक गुरुदेव गुप्ता, मुरलीधर गुप्ता और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के घनश्याम प्रधान सहित अन्य शिक्षक भी उपस्थित रहे।

