रायगढ़ में 4 अक्टूबर को आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य पात्रता परीक्षा (CG SET) के दौरान चांदमारी स्थित परीक्षा केंद्र में हाथ में बंधे कलावे को लेकर विवाद सामने आया। अभ्यर्थियों और हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा नियमों का हवाला देते हुए कुछ अभ्यर्थियों के हाथ से पवित्र कलावा यानी मौली कटवाने के लिए कहा गया और इसका विरोध करने पर परीक्षा में बैठने में परेशानी की बात कही गई। मामले की जानकारी मिलने के बाद बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। इसके बाद करीब सात घंटे तक विरोध और स्कूल घेराव की स्थिति बनी रही। प्रशासन की ओर से शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित करने का आश्वासन दिए जाने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। मामले को लेकर हिंदू संगठनों ने कलावा काटे जाने से जुड़े सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कराने की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक, रायगढ़ में CG SET परीक्षा के लिए बड़ी संख्या में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा के दौरान चांदमारी स्थित केंद्र पर कुछ अभ्यर्थियों के हाथ में बंधे कलावे को लेकर आपत्ति जताई गई। अभ्यर्थियों का कहना था कि उनसे कलावा हटाने के लिए कहा गया। हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दिए जाने की बात कही गई। दूसरी ओर, केंद्र प्रबंधन की ओर से इसे परीक्षा संबंधी नियमों और सुरक्षा व्यवस्था से जोड़कर बताया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, विवाद के बाद मामला तेजी से बढ़ गया और केंद्र के बाहर प्रदर्शन शुरू हो गया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता परीक्षा केंद्र पहुंचे और केंद्र प्रभारी से बातचीत की। संगठन की ओर से सवाल उठाया गया कि यदि कलावा हटाना केवल स्वैच्छिक प्रक्रिया थी, तो परीक्षा में बैठने को लेकर अभ्यर्थियों को कथित तौर पर आपत्ति क्यों जताई गई। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका आरोप था कि परीक्षा के नाम पर धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीक को हटाने का दबाव बनाया गया।
विवाद बढ़ने के बाद पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन संगठन अपनी मांगों पर कायम रहे। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल की घेराबंदी कर दी। इसके कारण स्कूल के शिक्षक और कर्मचारी काफी देर तक परिसर के भीतर ही रहे। शाम तक मामला शांत नहीं हुआ तो विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण होने पर अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों के साथ एसडीएम और तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की।
हिंदू संगठनों की ओर से संबंधित केंद्र प्रभारी को तत्काल निलंबित करने और कलावा कटवाने वाले शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई। करीब सात घंटे तक चले विरोध के बाद प्रशासन ने संबंधित शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए समिति गठित करने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट में एफआईआर और जांच समिति की कार्रवाई की जानकारी दी गई है, जबकि मामले में अंतिम रूप से जिम्मेदारी किसकी तय होती है, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा।
हिंदू संगठनों ने यह भी मांग रखी कि परीक्षा केंद्र में कलावा काटे जाने से संबंधित सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए और यह देखा जाए कि घटनाक्रम के दौरान कोई फुटेज हटाई या डिलीट तो नहीं की गई। संगठनों ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों को लेकर परीक्षा केंद्रों पर स्पष्ट और समान नियम होने चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों के साथ किसी प्रकार का विवाद न हो।
इस मामले ने परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और ड्रेस/धार्मिक प्रतीकों से जुड़े नियमों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, किसी भी नियम के उल्लंघन या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। प्रशासन की ओर से गठित समिति की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
गौरतलब है कि रायगढ़ में 4 अक्टूबर को CG SET 2026 का आयोजन किया गया था। परीक्षा के लिए जिले में 84 केंद्र बनाए गए थे और करीब 19 हजार 92 अभ्यर्थियों के शामिल होने की जानकारी पहले जारी की गई थी।
हिंदू संगठनों ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों के साथ भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा नहीं होनी चाहिए। वहीं, प्रशासन के सामने अब जांच के जरिए यह स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है कि परीक्षा केंद्र पर कलावा हटाने के निर्देश किस स्तर पर दिए गए, उनका आधार क्या था और पूरे घटनाक्रम में नियमों का पालन किस प्रकार किया गया।

