छत्तीसगढ़ की आगामी विधानसभा राजनीति को लेकर भाजपा और कांग्रेस से अलग एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच तैयार करने की कवायद तेज होती दिखाई दे रही है। रायपुर के तेलीबांधा स्थित होटल बेबीलॉन कैपिटल में विभिन्न क्षेत्रीय राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक मोर्चों के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक हुई। बैठक में करीब 50 राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संगठनों को एक मंच पर लाने और साझा राजनीतिक कार्यक्रम तैयार करने को लेकर चर्चा हुई। हालांकि, सार्वजनिक रूप से बैठक में शामिल प्रमुख संगठनों के तौर पर नौ नाम सामने आए हैं।
बैठक की जानकारी तीसरे मोर्चे की ओर से सिरिल कुमार द्वारा साझा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग वैचारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि वाले संगठनों के बीच साझा न्यूनतम राजनीतिक कार्यक्रम तैयार करना तथा छत्तीसगढ़ के स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर एक राजनीतिक विकल्प की संभावनाओं पर विचार करना रहा। प्रतिनिधियों ने चर्चा की कि अलग-अलग दल अपनी स्वतंत्र पहचान और विचारधारा बनाए रखते हुए कुछ साझा मुद्दों पर न्यूनतम कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं।
बैठक में जल, जंगल और जमीन, स्थानीय रोजगार, किसान हित, आदिवासी अधिकार, सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय अस्मिता, विकेंद्रीकरण, पारदर्शी शासन और भ्रष्टाचार निरोध जैसे मुद्दों को साझा राजनीतिक एजेंडे में शामिल करने पर विचार किया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ के स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की जरूरत है।
बैठक में बहुजन समाज पार्टी के प्रतिनिधि मंडल की ओर से जोन प्रभारी खटकर, छत्तीसगढ़िया पार्टी से देवराज साहू, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच से पुरन लाल साहू, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से मिथलेश कुमार, भीम आर्मी/आजाद समाज पार्टी से मनोज बंजारे, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) से जितेंद्र बंजारे, हमर राज पार्टी से विनोद नागवंशी, बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा से नवनीत चांद और छत्तीसगढ़ महतारी पार्टी से विवेक पटेल के नाम सामने आए हैं।
प्रतिनिधियों के मुताबिक, प्रस्तावित तीसरे मोर्चे का उद्देश्य केवल चुनावी गठबंधन तक सीमित रखने के बजाय साझा राजनीतिक एजेंडा तैयार करना है। आगामी बैठकों में साझा न्यूनतम कार्यक्रम, संगठनात्मक समन्वय, विधानसभा क्षेत्रों में आपसी तालमेल और संयुक्त घोषणापत्र सहित अन्य विषयों पर चर्चा आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
जल-जंगल-जमीन और स्थानीय अधिकारों को लेकर प्रतिनिधियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले लाभ में स्थानीय समुदायों की भागीदारी, आदिवासी और पारंपरिक समुदायों के अधिकार, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, किसानों से जुड़े विषय, शिक्षा, स्वास्थ्य और नगरीय सुविधाओं जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके साथ ही प्रशासनिक जवाबदेही और स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी पारदर्शिता का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि मतदाता सूची, चुनाव कार्यक्रम, मतदान, मतगणना, चुनावी खर्च और शिकायत निवारण सहित निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग से चुनाव संबंधी निर्णयों को संविधान, निर्वाचन कानून और निर्धारित नियमों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से संचालित करने की मांग रखी।
बैठक से जुड़ी रिपोर्टों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव या निंदा प्रस्ताव पारित किए जाने का भी उल्लेख है। हालांकि, इस संबंध में अलग-अलग रिपोर्टों में विवरण अलग है। इसलिए इसे बैठक में प्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई मांग या प्रस्ताव के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि किसी संवैधानिक संस्था के संबंध में स्थापित तथ्य के रूप में।
आगामी चरण में तीसरे मोर्चे से जुड़े संगठनों के बीच साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करने, संगठनात्मक समन्वय की रूपरेखा बनाने और विधानसभा क्षेत्रों में संभावित तालमेल पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा संभावित सीटों पर आपसी समन्वय, संयुक्त घोषणापत्र का प्रारूप और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ाने की योजना है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस पहल से जुड़ी अगली बड़ी बैठक अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में रायपुर में प्रस्तावित है। कुछ रिपोर्टों में 25 अक्टूबर और कुछ में 28 अक्टूबर की तारीख बताई गई है, इसलिए बैठक की अंतिम तारीख की आधिकारिक पुष्टि अभी अलग से अपेक्षित है।
छत्तीसगढ़ में इससे पहले भी भाजपा और कांग्रेस से अलग राजनीतिक गठजोड़ और क्षेत्रीय विकल्प सामने आते रहे हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन हुआ था। 2023 के विधानसभा चुनाव में भी कई क्षेत्रीय और छोटे दल चुनाव मैदान में थे। ऐसे में मौजूदा पहल का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग संगठनों के बीच सीटों, नेतृत्व, साझा कार्यक्रम और संगठनात्मक ढांचे को लेकर कितनी सहमति बनती है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रस्तावित मंच की दिशा केवल दलों की संख्या से तय नहीं होगी, बल्कि साझा नीति, संगठनात्मक अनुशासन, स्थानीय मुद्दों से जुड़ाव और पारदर्शी राजनीतिक कार्यप्रणाली महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल यह पहल चर्चा और संगठनात्मक समन्वय के चरण में है। आगामी बैठकों में यदि साझा कार्यक्रम और चुनावी तालमेल पर सहमति बनती है, तो छत्तीसगढ़ की 2028 विधानसभा चुनावी राजनीति में इस मंच की औपचारिक भूमिका को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

