कांग्रेस प्रवक्ता को भाजपा महामंत्री विकास की सलाह…संघ पर आरोप लगाने के पहले कांग्रेस का चरित्र झाँके
रायगढ़ । देश में वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। राष्ट्रीय स्तर भाजपा और कांग्रेस में जहां आरोप – प्रत्यारोप सामने आ रहे हैं। वहीं जिला स्तर पर भी बयानबाजी से राजनीतिक बहस छिड़ गई है। संघ को लेकर जिला कांग्रेस प्रवक्ता हरेराम तिवारी के बयान पर पटलवार करते हुए महामंत्री भाजपा विकास केडिया ने कहा कांग्रेस अपने ज्ञान चक्षु खोले। कांग्रेस ने पूछा कि संघ की शाखाओं में वंदे मातरम् कब गूंजा? बहुत विनम्रता के साथ विकास केडिया ने कहा संघ पर चर्चा चुनावी विषय नहीं बल्कि हमारी राष्ट्रवाद की समझ का सवाल है।
संघ और वंदे मातरम् का रिश्ता कांग्रेस से भी पुराना है। बूढ़े हो रह कांग्रेस प्रवक्ता को स्मरण दिलाते हुए कहा वंदे मातरम् की रचना 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी जी ने की थी। 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में खुद गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी ने इसे गाया। तब आरएसएस का जन्म भी नहीं हुआ था।1925 में जब डॉ. हेडगेवार जी ने संघ की स्थापना की, तो उन्होंने संघ के लिए प्रार्थना बनाई -नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे” ।
इस प्रार्थना को वंदे मातरम् का वैचारिक विस्तार बताते हुए कहा अपनी मातृभूमि को माँ मानकर उसकी वंदन करना संघ की प्रार्थना में शामिल है। संघ की हर शाखा में हर दिन भारत माता की वंदना ही तो होती है। संघ कभी गीत को पोस्टर नहीं बनाता, बल्कि संघ से जुड़ा हर कार्यकर्ता उसे अपने जीवन में भी जीता है।1937 के दौरान कांग्रेस ने वंदे मातरम् गीत को विस्तार देने की बजाय संकुचित किया।
हरे राम जी आप 1937 के ऐतिहासिक निर्णय की बात कर रहे हैं तो देश को पूरा सच बताइए। सच ये है कि 1937 में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के विरोध के कारण वंदे मातरम् के 6 छंदों में से केवल 2 छंदों को ही राष्ट्रीय उपयोग के लिए स्वीकार किया। ये निर्णय तुष्टिकरण की शुरुआत थी। उस समय आपने मां की वंदना को भी वोट बैंक के तराजू में तोल दिया। और आज 2026 में आपकी कार्यसमिति उसी तुष्टिकरण को आगे बढ़ा रही है। फर्क सिर्फ इतना है, तब आपने गीत को काटा था, अब आप पूरे गीत को गाने से ही इनकार कर रहे हैं। विकास केडिया ने कहा भाजपा ने वंदे मातरम् को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की बजाय अपने हृदय में उतारा। भाजपा के लिए वन्देमातरम राजनीति का विषय नहीं है।
मुद्दे का राजनीतिकरण कांग्रेस कर रही है। तिवारी जी, वंदे मातरम् को राजनीतिक मुद्दा हमने नहीं, आपने बनाया। जब संसद में कानून बनाकर इसके सम्मान को स्थापित किया गया, तो उसके विरोध में प्रस्ताव पास करने वाली कांग्रेस है, भाजपा नहीं। हम तो आज भी वही कह रहे हैं जो हमारे पुरखों ने कहा था।आजादी का बुलंद जयघोष है वंदे मातरम् ।आजाद की पिस्तौल और भगत का जोश है वंदे मातरम् ।
आप पूछते हैं देशभक्ति गीत से साबित होगी या काम से? विकास केडिया ने कहा जिसका दिल राष्ट्रीय गीत का अपमान करे, उससे काम की उम्मीद कैसे की जाए? देशभक्ति दिल में हो तो जुबान पर वंदे मातरम् आने में शर्म कैसी? राष्ट्रगीत का सम्मान होना चाहिए, लेकिन सम्मान का अर्थ मौन विरोध नहीं होता। सम्मान का अर्थ है गर्व से गाना।

